पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और युद्ध की तैयारी – एक विश्लेषण
हाल ही में भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 21 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया। यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी। इसके बाद पाकिस्तान सरकार ने भारत को जवाब देने की चेतावनी दी है और युद्ध जैसी तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन क्या पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक स्थिति उसे एक पूर्ण युद्ध झेलने की अनुमति देती है?
2023 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दिवालिया होने की कगार पर पहुँच गई थी। देश को चलाने के लिए पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से कर्ज मांगने के अलावा कोई रास्ता नहीं देखा। कर्ज पाने के लिए सरकार को छह मंत्रालयों को बंद करना पड़ा, डेढ़ लाख सरकारी नौकरियों को समाप्त करना पड़ा, और चार सरकारी बैंकों सहित PIA (पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस) को बेचने की योजना बनानी पड़ी।
सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए कर दायरे का विस्तार किया। 2023 में 3 लाख नए करदाता जुड़े और 2024 में यह संख्या बढ़कर 8 लाख हो गई। इस प्रकार, कुल करदाताओं की संख्या 16 लाख से बढ़कर 32 लाख हो गई। लेकिन इसके बावजूद, कराधान में गंभीर असमानता देखी गई — वेतनभोगी लोग अपने आय का 10% टैक्स देते हैं, जबकि व्यापारी वर्ग केवल 60 पैसे प्रति 100 रुपये टैक्स देता है।
भारत की तुलना में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर है। 2023 में भारत की GDP 4.2 ट्रिलियन डॉलर थी, जबकि पाकिस्तान की GDP केवल 374 बिलियन डॉलर रही। भारत में प्रति व्यक्ति आय 2,711 डॉलर रही, वहीं पाकिस्तान में यह 1,581 डॉलर थी। IMF ने भविष्यवाणी की है कि 2025 में पाकिस्तान की GDP वृद्धि दर केवल 2.6% रहेगी।
वर्तमान में पाकिस्तान की कुल GDP लगभग ₹31.9 लाख करोड़ है, जो कि भारत के एक राज्य महाराष्ट्र की GDP ₹42.6 लाख करोड़ से भी कम है। तमिलनाडु जैसे राज्य की GDP भी पाकिस्तान के करीब पहुँच चुकी है।
ऐसे समय में, पाकिस्तान की सरकार ने 2025–26 बजट में रक्षा खर्च में 18% की वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। इसका मतलब है कि आर्थिक तंगी के बावजूद, पाकिस्तान युद्ध पर अधिक खर्च करने की योजना बना रहा है। लेकिन जब देश का अधिकतर राजस्व सिर्फ कर्ज चुकाने में चला जाता है, तब यह सवाल उठता है — क्या पाकिस्तान एक लंबे युद्ध को झेल सकता है?
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक रूप से कमज़ोर पाकिस्तान भारत जैसे देश से युद्ध की स्थिति में टिक नहीं पाएगा। बयानबाज़ी और दिखावटी तैयारी के पीछे एक ढहती हुई अर्थव्यवस्था है, जो दीर्घकालिक संघर्ष को नहीं संभाल सकती।