मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव: ईरान का दावा – इज़राइल के दो F-35 स्टील्थ फाइटर जेट मार गिराए
मध्य पूर्व में इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इज़राइल के दो F-35 स्टील्थ फाइटर जेट को मार गिराया है। यदि यह दावा सत्य साबित होता है, तो यह वैश्विक रक्षा रणनीतियों के लिए एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि F-35 को दुनिया का सबसे अत्याधुनिक और अदृश्य लड़ाकू विमान माना जाता है।
मित्रता से दुश्मनी तक: इज़राइल-ईरान संबंधों का इतिहास
1979 की इस्लामी क्रांति से पहले तक ईरान और इज़राइल मजबूत सहयोगी हुआ करते थे। ईरान में शाह के शासनकाल में इज़राइल को राजनीतिक और सैन्य समर्थन प्राप्त था। लेकिन 1979 में ईरान में सत्ता परिवर्तन के साथ ही इस्लामी गणराज्य की स्थापना हुई, जिसने इज़राइल को एक वैचारिक दुश्मन घोषित कर दिया। ईरान ने इज़राइल और अमेरिका को “इस्लाम के शत्रु” घोषित किया।
तब से दोनों देशों के बीच शीत युद्ध जैसे हालात बन गए। ईरान ने सीधे युद्ध के बजाय हमास (गाजा), हिज़बुल्लाह (लेबनान), और हूती (यमन) जैसे संगठनों के ज़रिए इज़राइल के विरुद्ध परोक्ष लड़ाई शुरू की।
अक्टूबर 7 हमला: निर्णायक मोड़
7 अक्टूबर 2023 को, हमास ने इज़राइल पर भीषण हमला किया, जिसमें 1,200 से अधिक नागरिक मारे गए और 200 से अधिक बंधक बना लिए गए। इस हमले ने इज़राइल को बौखला दिया और उसने व्यापक जवाबी कार्रवाई शुरू की।
ऑपरेशन “राइजिंग लायन”: इज़राइल का पलटवार
2024 के अंत तक, जब ईरान ने सीधे मिसाइलें इज़राइली ठिकानों पर दागी, इज़राइल ने “ऑपरेशन राइजिंग लायन” नामक बड़े पैमाने पर हवाई हमला शुरू किया। इस ऑपरेशन में F-15, F-16 और विशेष रूप से अमेरिका निर्मित F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स का उपयोग किया गया।
F-35 को दुनिया का सबसे आधुनिक और अचूक लड़ाकू विमान माना जाता है। इसकी रडार से छुपने की क्षमता और उच्च गतिशीलता इसे दुश्मन के हवाई सुरक्षा नेटवर्क से बचाकर लक्ष्य भेदने की सुविधा देती है।
ईरान का दावा: दो F-35 जेट मार गिराए
ईरान के भारत स्थित दूतावास ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इज़राइल के दो F-35 विमानों को मार गिराया और कई ड्रोन को भी नष्ट किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एक महिला इज़राइली पायलट को गिरफ्तार किया गया है।
हालांकि, इज़राइल ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि “हमारे किसी भी फाइटर जेट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। हम अपने लक्ष्य पर सटीक और प्रभावशाली हमले कर रहे हैं।”
क्या F-35 वास्तव में गिराया जा सकता है?
F-35 लाइटनिंग II एक पाँचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसे अमेरिका द्वारा डिजाइन किया गया है। इसकी स्टील्थ तकनीक इसे रडार से लगभग अदृश्य बनाती है। इसे गिराना दुनिया की किसी भी वायुसेना के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जाती है।
लेकिन इतिहास में इससे पहले भी एक स्टील्थ विमान गिराया गया है।
1999: जब F-117A गिराया गया था
कोसोवो युद्ध के दौरान, यूगोस्लाविया ने अमेरिका के स्टील्थ फाइटर F-117A नाइटहॉक को S-125 मिसाइल सिस्टम की मदद से मार गिराया था। यह पहली बार था जब किसी स्टील्थ विमान को जमीन से गिराया गया।
इस घटना से यह स्पष्ट हुआ कि अत्याधुनिक विमान भी तकनीकी खामियों या चतुर रणनीति की वजह से निशाना बन सकते हैं।
क्या ईरान ने वही कारनामा दोहराया?
अगर ईरान ने वाकई F-35 को मार गिराया है, तो यह संकेत हो सकता है कि उसने अत्याधुनिक एंटी-एयर सिस्टम विकसित कर लिए हैं। ईरान लंबे समय से “Bavar-373” जैसे स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम को विकसित करने का दावा करता रहा है, जो रूसी S-300 प्रणाली से प्रेरित है।
हालांकि, अभी तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि ईरान वास्तव में F-35 को ट्रैक और मार गिराने में सक्षम है।
संभावित वैश्विक प्रभाव
अगर F-35 के गिराए जाने की पुष्टि होती है, तो यह अमेरिका और इज़राइल के लिए बड़ा रणनीतिक झटका होगा। इससे न केवल इन विमानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे, बल्कि वैश्विक सुरक्षा समीकरण भी बदल सकते हैं।
इसके अलावा, यदि इज़राइली पायलट को बंदी बनाया गया है, तो यह कूटनीतिक और सैन्य संकट में बदल सकता है।
क्षेत्रीय युद्ध की आशंका
ईरान और इज़राइल के बीच यह सीधा टकराव पूरे मध्य पूर्व को युद्ध की आग में झोंक सकता है। अमेरिका के सैन्य ठिकाने भी इस क्षेत्र में हैं और यदि संघर्ष बढ़ता है, तो अन्य देश भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं स्थिति को शांत करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन F-35 से जुड़ी खबरों ने माहौल और भी विस्फोटक बना दिया है।
निष्कर्ष
जब तक इस दावे की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक F-35 के गिराए जाने की संभावना ही दुनिया के सैन्य रणनीतिकारों को चिंतित करने के लिए काफी है। अगर यह सत्य सिद्ध होता है, तो यह न केवल ईरान के लिए प्रतीकात्मक जीत होगी, बल्कि आधुनिक युद्धक विमानों की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न भी होगा।
इस घटना से यह भी संकेत मिलता है कि अब युद्ध सिर्फ हथियारों का नहीं, बल्कि तकनीक, खुफिया रणनीति और साइबर डिफेंस का भी बन चुका है।